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Monday, March 20, 2023

नारी भी तुम, सुकुमारी भी तुम – भारती नामदेव

नारी भी तुम, सुकुमारी भी तुम
 हो ज्वाला सी चिंगारी भी तुम
                           सृष्टि का हो सार भी तुम
                           तो जीवन का आधार भी तुम
                          भक्ति की आवाज भी तुम
                          तो शक्ति का आगाज भी तुम
नारी भी तुम सुकुमारी भी तुम
हो ज्वाला सी चिंगारी भी तुम
                             हो वीणा की झंकार भी तुम
                              तो दुर्गा सी हुंकार भी तुम
                             हो मृगनयनी सी चंचल तुम
                          तो विंध्यवासिनी अचल भी तुम 
नारी भी तुम सुकुमारी भी तुम
हो ज्वाला सी चिंगारी भी तुम 
                           हो दुनिया से अंजान भी तुम
                          तो दुनिया की पहचान भी तुम
                              जो कहते हे गुमनाम हो तुम
                           तो उनका भी तो नाम हो तुम
नारी भी तुम सुकुमारी भी तुम
हो ज्वाला सी भी चिंगारी तुम
                                                 – भारती नामदेव 

हुंकार – डॉ मनीषा दंडवते

हाँ हूँ मैं ,सबला,सुमेधा,सुरेखा,
मत समझो ,मुझे जुही की कली,
मत समझो मुझे अबला,
मैं हूँ अब “शक्ति स्वरूपा -दुर्गा “
हाँ है मुझ में बल,बुद्धि,कौशल
नहीं मैं किसी से कम,
मत समझो मुझे अज्ञानी,
मैं हूँ अब “पुत्री स्वरूपा-शारदा “
हाँ हूँ मैं परिवार,समाज,देश की धूरी
नहीं किसी से मैं डरती,
मत समझो मुझे अपने अधीन,
मैं हूँ अब “स्वतंत्र स्वरूपा-लक्ष्मी “
हाँ है,अब भी मुझ में करुणा,माया,ममता
प्रकृति हूँ मैं,धरती हूँ मैं,
बीज की धारिणी हूँ मैं,
पर अब किसी की बंदिनी नहीं मैं!
धरोहर हूँ , अपने माता-पिता की,
धरोहर हूँ ,हर उस चाहने वाले की,
जिसने मुझे मनुष्य रूप में स्वीकारा,
मेरे अस्तित्व,मेरी भावनाओं को समझा,
मुझे माटी की मूरत न माना,वरन
मेरे गुणों को पहचान कर स्वीकारा,
अब मैं बंध न सकुंगी ,अन्याय को सह न सकुंगी,
क्योंकि,प्रतिकार की शक्ति को मैं-जान गई हूं
मेरे अस्तित्व के बिना “ठूँठ” है ये समाज,
“बजा ले डंका “ कितना भी,मेरे बिना राग ना
अलाप सके गा ये समाज,
क्योंकि- हाँ मैं हूँ, मैं थी, मैं रहूँगी
बीच में,केंद्र में,मध्य में
और अखिल विश्व घूमेगा चारों ओर मेरे,क्योंकि
हाँ हूँ मैं,परिवार,समाज,देश की धूरी !
मत समझो मुझे जुही की कली,
मत समझो मुझे जुही की कली .
– डॉ. मनीषा दंडवते

नारी शक्ति महान – शीला गोदरे

नारी को अबला कहते हैं । 
पर कभी नारीत्व ना जाना ।।
 नारी चाहे तो घर को स्वर्ग बना दे।

चाहे तो क्षण भर में घर को नर्क बना दे
 सब कहते है नारी अपने रूप बदली है। 
अरे मुसीबत में वही "नारी" दुर्गा बन जाती है।

  इतना ही नहीं देवी बनकर पूज्यनीय हो जाती
  सम्मान , सत्कार, उच्च पद पाकर 
सदा अपना कर्त्तव्य निभाती

नारी के सतीत्व को सबने जाना है
अग्नि भी शांत हो जलमग्न हो जाती है
नारी महान तांडव नृत्य दिखाती

पल भर में निर्मोही को मोही बनाती  
नारी शक्ति स्वरूपा बन हर रूप को बखूबी निभाती
मुसीबत में आंचल बिछा , सबका रक्षा कवच बन जाती
 सच में नारी तू नारायणी बन धरती को स्वर्ग बनाती
                                     – शीला गोदरे 

मै नारी हूं – कमल पटेल जी

मैं नारी हूं।, मैं पूरे घर की जिम्मेदारी हूं। सबको शिकायत होती है मुझसे, फिर भी लगती सबको प्यारी हूं मैं नारी हूं, पूरे घर की जि...